एडमिन लागिन

ग्रंथ सागर

श्री विश्वशान्ति आश्रम

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जी. ए. I-13, त्रिवेणीपुरम, झॅूंसी प्रयागराज (उ.प्र.) 211019, 
मोबाइल. 9235400255, 8923329929
वेबसाइट. www.shrivishwashantiashram.org
ई-मेल. vishwashantiashram@gmail.com


 हमारा कार्यक्रम

  • प्रयागराज- * मार्च अथवा अप्रैल में अर्धवार्षिक सत्संग *
    * 21 सितम्बर से 25 सितम्बर तक वार्षिक सत्संग *
    * 14 जनुअरी से महाशिवरात्रि तक माघ मेले में सत्संग व प्रचार-प्रसार *
    * 5 फरवरी को पूर्ण स्मृति समारोह *
    * प्रत्येक रविवार को आश्रम में सामूहिक सत्संग *
    * नगर में व स्कूल कॉलेजों में सुविधानुसार सार्वजानिक स्थानों पर वाहन द्वारा प्रचार-प्रसार होता रहता है*
    बिजनौर- वर्ष के जून माह में बिजनौर सत्संग मंडली द्वारा सत्संग का आयोजन
    कानपूर - अक्टूबर अथवा नवंबर माह में कानपुर सत्संग मंडली द्वारा सत्संग

    दिल्ली : नवम्बर माह में 'दिल्ली सत्संग मण्डली' द्वारा सत्संग का आयोजन

    मुरादाबाद : नवम्बर माह में 'मुरादाबाद सत्संग मण्डली' द्वारा सत्संग का आयोजन

    सहारनपुर : नवम्बर माह में 'सहारनपुर सत्संग मण्डली' द्वारा सत्संग का आयोजन

    प्रचार- प्रसार- 1. प्रयागराज में 14 जनवरी से फरवरी माह में महाशिवरात्री तक माघ मेले में वाहन और स्टॉल द्वारा ग्रन्थों का प्रचार-प्रसार किया जाता है। 2. जुलाई माह गोवर्धन में वाहन द्वारा ग्रन्थों का प्रचार-प्रसार किया जाता है। 3. दीपावली के शुभ अवसर पर प्रत्येक वर्ष चित्रकूट में चार-पाँच दिन का वाहन द्वारा प्रचार-प्रसार किया जाता है। 4. नगर में सुविधानुसार विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर वाहन द्वारा प्रचार-प्रसार किया जाता है। 5. प्रत्येक महाकुम्भ और अर्द्धकुम्भ के अवसर पर हरिद्वार, नासिक, उज्जैन में वाहन व स्टॉल लगाकर ग्रन्थों का प्रचार-प्रसार भगवत भक्तों द्वारा किया जाता है।

    निःशुल्क चिकित्सा- 1. आश्रम में कुशल होम्योपैथ चिकित्सक द्वारा प्रतिदिन निःशुल्क सर्वजन की सेवा की जाती है। जिसमें होम्योपैथिक दवाओं का वितरण भी निःशुल्क दी जाती है। समय : शायंकाल - 4 बजे से 6 बजे तक 2. महाकुम्भ, अर्द्धकुम्भ एवं प्रत्येक माघ मेले में प्रतिवर्ष आश्रम द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाकर जनता-जनार्दन की ऐलोपैथिक दवाओं द्वारा इलाज किया जाता है। शिविर में सूगर, ब्लड-प्रेशर इत्यादि की जाँच भी निःशुल्क की जाती है।

  •  मूल्य सेवा का ज्ञान

  • आप अपना अहोभाग्य समझकर श्री ग्रन्थ को स्वीकार करें और अपने हितार्थ अर्थ प्रदान करें (*) ।

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